सावन की घटाएं, धान के खेत, फुहारों में खोये रास्ते, और . . . उदास एक सफ़र. . .

सुबह-सुबह बस से सफ़र करते हुए मैंने धान के खेतों का थोड़ा सा हरा रंग चुरा कर अपने झोले में भर लिया, और कुछ पुरवाई के झोंके और बूँदें भी. . .बादलों को ये चोरी शायद नागवार गुजरी होगी.

2014-08-03 10.54.27कहाँ जाता है पानी में भीगा ये रास्ता? शायद अम्मा के घर. अम्मा ने दाल चढ़ा दी होगी चूल्हे पर और बादलों को निहारती सोच रही होगी कि इस बार फसल अच्छी हो तो बरसाती खरीद ले, अन्दर का कोठार चूता है, और गुड्डू के लिए एक जोड़ी जूते खरीद दे.2014-08-03 10.47.14ये पेड़ दुनिया के सबसे सुन्दर स्वप्न देख रहे हैं. इसी स्वप्न से फूल खिलते हैं, फल पकते हैं, मंजरिया गुनगुनाती हैं और महुआ रात भर चूता है…2014-08-03 10.56.13[0] 2014-08-03 10.49.50 2014-08-03 10.56.03[0] 2014-08-03 10.54.31 2014-08-03 10.50.07

और एक तपती दुपहरी बादल कुछ यूं आये मेरे शहर

एक अंधियारी दुपहरी . . .

मेरे सूने आँगन में आज हँसी गूँज उठी

सुबह खिलने से ठीक पहले इन्हें देखा एक खूबसूरत दिन का वादा मुझसे करते हुए.Image Image

और झूटा नहीं था वो.वादा.

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जब मालती महकती है मेरे घर…

जब मालती महकती है मेरे घर...

काली-काली घटाएं जब घेर लेती हैं आकाश और रह-रह कर बादलों के राग से धरती थर्रा उठाती है मालती महकती है मेरे घर. . .

बादल आ गए . . .

बादल आ गए . . .

इन ‘काली-कजरारी’ घटाओं को यूं उमड़ते-घुमड़ते आज की अंधियारी सुबह देखा और गन्धर्व यद आये, मेघों जैसे गहन-गंभीर स्वर में कहते “अवधूता . . . गगन घटा गहरायी . . . हो. . . ” और मन भर आया.